डॉक्टर दादी, एंबुलेंस दादा से लेकर वृक्ष पुरुष तक पद्म पुरस्कार पाने वाले 10 गुमनाम चेहरे

7# हाई-वे मसीहा
– गुजरात के रहने वाले डॉ. सुब्रतो दास का नाम भी पद्मश्री पाने वालों में है। डॉ. सुब्रतो को मेडिसिन कैटेगिरी में पुरस्कार दिया गया है।

– डॉ. सुब्रतो को हाई-वे मसीहा के नाम से जाना जाता है। वे हाई-वे पर एक्सीडेंट में घायल होने वालों को तुरंत मेडिकल फैसिलिटी मुहैया कराते हैं।

8# फायर फाइटर
– प. बंगाल के रहने वाले बिपिन गनात्रा को सोशल वर्क कैटेगिरी में सम्मािनत किया जाएगा।
– 59 साल के बिपिन वालंटियर फायर फाइटर हैं, जो पिछले 40 साल से कोलकाता में आग लगने वाली हर जगह मौजूद रहते हैं और लोगों को बचाने में मदद करते हैं।
– एक हादसे में अपने भाई को खोने के बाद बिपिन ने ऐसे लोगों की मदद का बीड़ा उठाया, जो आग लगने जैसे हादसों में फंस जाते हैं।
9# चिंताकिंदी मल्लेशम
– तेलंगाना के चिंताकिंदी मल्लेशम ने लक्ष्मी ASU मशीन बनाई, जिससे पोचमपल्ली सिल्क की साड़ियां बनाने वाले कारीगरों की मेहनत और काम में लगने वााल वक्त काफी घट गया।
– 44 साल के मल्लेशम की मां पोचमपल्ली सिल्क की साड़ियां बनाती थीं। मेहनत के चलते उन्हें बहुत दर्द होता था, जिसको देखने के बाद मल्लेशम ने ये मशीन बनाई।
– पोचमपल्ली सिल्क से साड़ियां बनाने वाले 60% कारीगर इस मशीन से फायदा उठा रहे हैं।
10 # मरियप्पन थंगवेलु
– मरियप्पन ने रियो पैरालंपिक्स 2016 में T-42 हाईजंप में गोल्ड जीता। 21 साल के मरियप्पन तमिलनाडु के रहने वाले हैं।
– मरियप्पन ने अपनी दाई टांग एक हादसे में गंवा दी थी। उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।